दिल है छोटा सा
छोटी सी 'आशा'
सात सुरों के आंगन में,
यही नाम तो था
प्यारा सा।
कभी चंचलता
कभी सादगी
वो चेहरा मानो
नाज़ुक फूलों का
पाला था
वो नन्हीं जान
बड़ा हौसला
लेकर चली थी
हथेली पर
बालिवुड के इस
महाकुंभ ने
उसको झट
पहचाना था
वो "झुमका गिरा रे
बरेली के बाज़ार में"
की खनक निराली,
उस "दम मारो दम" की
मस्ती दुनियाभर ने
खूब सराही थी
कैबरे डिस्को
ठुमरी दादरा
हर रंग में खुद को
ढाला था
"पिया तू अब तो आजा"
कह कर,
हर महफ़िल को
खूब संभाला था
कभी "इन आँखों की
मस्ती के" मस्ताने
हज़ारों देखे थे
तो कभी "दिल
चीज़ क्या है" में,
वफ़ाओं के क्या खूब
नज़ारे बोए थे
जब "चुरा लिया है
तुमने जो दिल को"
गुनगुनाया था,
हर जवां दिल को
धड़कना जैसे,
उस गीत ने ही
तो सिखाया था।
वो "परदे में रहने दो"
का अंदाज़ अब
कहीं खो गया,
"रात अकेली है"
गाते-गाते, जैसे
सूरज सो गया।
"दो लफ्जों की है
दिल की कहानी"
कह कर वो
चुप हो गईं,
न जाने कितनी
अनकही बातें,
वक्त के गर्त में
खो गई।
बर्मन दा की
धुनों पर जब जब
इस आवाज़ ने
सुर की चादर
तानी थी
बन गई हर प्रेमी के
दिल की, वो अमर
प्रेम कहानी थी
"मेरा कुछ सामान"
मांगती वो आवाज़,
न जाने क्यों अचानक
खामोश हो गई,
संगीत की दुनिया की
छोटी सी 'आशा'
शायद मां की गोद में
जाकर सो गई....
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