Friday, April 10, 2026

हिंदी कविता ५

सांझ की चौखटपर
हर रोज बैठता हूँ... 
मन से कूछ अनचाहे पल 
उसकी गोद में 
बिखेर देता हू.... 
शायद किसी सांझ सुकून मिले.....

-: मनु :-

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