पिता
कभी अभिमान तो कभी स्वाभिमान हैं पिता
कभी धरती तो कभी आसमान हैं पिता
जन्म दिया हैं अगर माँ ने
जानेगा जिससे जग वो पहचान हैं पिता
कभी कंधे पे बिठा के मेला दिखाता हैं पिता
कभी बनके घोड़ा घूमाता हैं पिता
माँ अगर पैरों पर चलना सिखाती हैं
पैरों पर खड़ा होना सिखाता हैं पिता...
अनामिक

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