Friday, April 10, 2026

हिंदी कविता ६

पोथी पढ़ि-पढ़ि जग मुआ, 
पंडित भया न कोय, 
ढाई आखर प्रेम का, 
पढ़े सो पंडित होय।

संत कबीर

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